एआरसी, भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई, बीकानेर ने मनाया 46वाँ स्थापना दिवस

4 अप्रैल, 2019, बीकानेर

भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के शुष्क क्षेत्र परिसर (एआरसी) ने आज पूरे जोश और उत्साह के साथ अपना 46वाँ स्थापना दिवस मनाया।

प्रो. (डॉ.) विष्णु शर्मा, कुलपति, राजुवास और एसकेआरएयू ने इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर भेड़ किसानों से कृषि, बागवानी और पशुपालन की मिश्रित कृषि प्रणाली को अपनाने का आग्रह किया। डॉ. शर्मा ने भेड़ किसानों की आय को दोगुना करने के लिए वैज्ञानिक भेड़ पालन प्रबंधन संबंधी मूल्यवान प्रथाओं को भी साझा किया।

 

ARC, ICAR-CSWRI, Bikaner celebrates 46th Foundation Day  ARC, ICAR-CSWRI, Bikaner celebrates 46th Foundation Day

डॉ. अशोक कुमार, सहायक महानिदेशक (पशु स्वास्थ्य), भाकृअनुप विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में भेड़ की नस्लों को उन्नत करने और भेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए संस्थान की भूमिका की सराहना की। डॉ. कुमार ने भेड़ के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी को भी साझा किया।

डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर ने विभिन्न भेड़ नस्लों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भेड़ की उत्पादकता बढ़ाने के लिए भेड़ के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में भी चर्चा की। डॉ. तोमर ने गरीब और सीमांत परिवारों के लिए स्थायी आय के तौर पर भेड़ पालन को सुनिश्चित स्त्रोत बताया।

डॉ. पी. एल. सरोज, निदेशक, भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर ने किसानों को अनार और बेर जैसी विभिन्न बागवानी फसलों की जानकारी दी।

डॉ. एच. के. नरुला, प्रमुख, शुष्क क्षेत्र परिसर (एआरसी) भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई, बीकानेर ने पिछले 45 वर्षों से शुष्क क्षेत्र के विकास में संस्थान के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों के बीच वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी का प्रसार करने और शुष्क क्षेत्र में भेड़ किसानों की आजीविका की स्थिति को बेहतर करने के लिए भी एआरसी परिसर की भूमिका को रेखांकित किया।

डॉ. गोपाल लाल, निदेशक, भाकृअनुप-एनएसएसआर, अजमेर; डॉ. आर. के. सांवल, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरसीसी, बीकानेर; ग्रुप कैप्टन के. एस. शेखावत, कार्यकारी निदेशक, सीडब्ल्यूडीबी; डॉ. एस. दहिया, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईआरबी, हिसार; डॉ. एन. वी. पाटिल, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईआरसी, मेरठ और डॉ. विनीत भसीन, प्रमुख वैज्ञानिक, भाकृअनुप भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

गणमान्य लोगों ने मगरा, चोकला और मारवाड़ी भेड़ क्षेत्रों का भी दौरा किया।       

पर्यावरण की रक्षा करने के उद्देश्य और रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र में वनसंवर्धन के महत्त्व के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए मारवाड़ी भेड़ क्षेत्र के गणमान्य लोगों द्वारा वृक्षारोपण किया गया।

इस अवसर पर टीएसपी लाभार्थियों के लिए एक किसान डायरी और ‘भेड़ में कृत्रिम गर्भाधान और भेड़ पालन को बढ़ावा देने के लिए रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र में उपलब्ध मुख्य चारा वनस्पति’ के लिए 2 तकनीकी फोल्डर्स भी जारी किए गए।

इस अवसर पर आयोजित किसान-वैज्ञानिक परस्पर संवादात्मक बैठक के दौरान लगभग 230 किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के शुष्क क्षेत्र परिसर (एआरसी))