एआईसीआरपी, ताड़ की 28 वीं वार्षिक समूह बैठक का हुआ आयोजन

6-7 जून, 2019, कोयम्बटूर

28th Annual Group Meet of AICRP on Palms organized

भाकृअनूप-अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, ताड़ ने 6 से 7 जून, 2019 तक तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बटूर में अपनी 28वीं वार्षिक समूह बैठक आयोजित की।

डॉ. डब्ल्यू. एस. ढिल्लों, सहायक महानिदेशक (बागवानी विज्ञान-1), भाकृअनुप, नई दिल्ली ने उद्घाटन सत्र के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास, सकल घरेलू उत्पाद में इसके महत्वपूर्ण योगदान और राष्ट्र की पोषण सुरक्षा को रेखांकित किया।

डॉ. पी. रेथिनम, पूर्व कार्यकारी निदेशक, एशियाई और प्रशांत महासागर नारियल समुदाय, जकार्ता; डॉ. के. मुरलीधरन, निदेशक, भाकृअनुप-सीपीसीआरआई, कासरगोड़ और डॉ. आर. के. माथुर, निदेशक, आईआईओपीआर, पेडवेगी भी सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

डॉ. एन. कुमार, कुलपति, टीएनएयू ने गुणवत्तापूर्ण रोपाई के उत्पादन के लिए मिश्रित मातृ उद्यानों को विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने मौसम के परमसंकट को देखते हुए सूखा शमन रणनीति विकसित करने के लिए ताड़ के वैज्ञानिकों से आग्रह किया।

डॉ. एच. पी. महेस्वरप्पा, परियोजना समन्वयक, एआईसीआरपी, ताड़, सीपीसीआरआई, कासरगोड़ ने पाँच फसलों - नारियल, तेलताड़, पलमायरा, अरेका नट और कोको पर परियोजना निदेशालय के मिशन की रूपरेखा तैयार की, जो 14 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश के 30 एआईसीआरपी केंद्रों में वितरित किए गए हैं। उन्होंने 13 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और 2 भाकृअनुप संस्थानों के साथ परियोजना निदेशालय के सहयोग पर प्रकाश डाला।

डॉ. के. एस. सुब्रमण्यन, निदेशक (अनुसंधान), तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बटूर ने इससे पहले गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।

उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र विविध प्रकार के विमोचन प्रस्ताव, आनुवांशिक संसाधन और फसल सुधार, फसल उत्पादन, फसल सुरक्षा और फसल कटाई के बाद की तकनीक पर आधारित थी।

डॉ. एल पुगलेंधी, डीन (बागवानी), बागवानी महाविद्यालय और अनुसंधान संस्थान, टीएनएयू, कोयम्बटूर ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

बैठक में विभिन्न एआईसीआरपी केंद्रों और भाकृअनुप संस्थानों के कुल 80 वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, ताड़, सीपीसीआरआई, कासरगो)