आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि-पद्धति के साथ-साथ एकीकृत कृषि को बढ़ावा देना जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

भाकृअनुप क्षेत्रीय समिति – I की 26वीं आभासी बैठक का हुआ आयोजन

30 जून, 2020, कृषि भवन, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद क्षेत्रीय समिति – I (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू- कश्मीर और लद्दाख) की 26वीं बैठक का आयोजन आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कृषि भवन, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। नियम 65 और भाकृअनुप सोसाइटी के कानूनों के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर सन 1975 में आठ क्षेत्रीय समितियों का गठन किया था। क्षेत्रीय समितियाँ कृषि अनुसंधान, शिक्षा और क्षेत्र में वर्तमान स्थिति पर चर्चा व समीक्षा करने के लिए द्विवार्षिक बैठक करती हैं।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि-पद्धति के साथ-साथ एकीकृत कृषि को बढ़ावा देना जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर  आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि-पद्धति के साथ-साथ एकीकृत कृषि को बढ़ावा देना जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि भाकृअनुप द्वारा निर्मित क्षेत्रीय समितियाँ कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि-वानिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास एजेंसियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए एक बेहतर मंच प्रदान करती हैं। केंद्रीय मंत्री ने खेती की दृष्टि से मैदानी और पहाड़ी इलाकों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि क्षेत्रीय समिति – I पहाड़ी होते हुए भी जलवायु समृद्ध, औषधीय कृषि, सुगंधित पौधे, केसर, महंगे व उन्नत फलों की खेती के मामले में संपन्न हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि-पद्धति के साथ-साथ एकीकृत कृषि को बढ़ावा देने की अत्यधिक जरूरत है। कृषि-क्षेत्र में केंद्र-सरकार द्वारा लाए गए नए निर्देश को लागू करने, किसानों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने तथा किसान और व्यापारी के बीच के बाधा को खत्म करने के लिए मंत्री महोदय ने राज्य-सरकारों से आग्रह किया।

श्री तोमर ने भाकृअनुप और संबंधित संस्थानों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्रीय समिति-I के लिए पिछली समितियों द्वारा लिए गए निर्णयों व सिफ़ारिशों ने इन प्रदेशों में कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत सफलताएँ अर्जित की हैं। उन्होंने फसल बीमा-योजना के फ़ायदों का जिक्र करते हुए किसानों से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन का भी आग्रह किया तथा एफपीओ से मिलने वाले लाभों को रेखांकित किया। मंत्री महोदय ने गाँव-गाँव में सभी किसानों के लिए कृषि से संबंधित अधो-संरचना और खाद्य-प्रसंस्करण ईकाई के स्थापना पर जोर दिया। 

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि-पद्धति के साथ-साथ एकीकृत कृषि को बढ़ावा देना जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर  आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि-पद्धति के साथ-साथ एकीकृत कृषि को बढ़ावा देना जरूरी: श्री नरेंद्र सिंह तोमर

सम्मानित अतिथि, श्री पुरुशोत्तम रूपाला, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने इस बैठक को काम-काजी बैठक का हिस्सा बताते हुए कहा कि राज्यों और केंद्र के कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा भाकृअनुप के अनुसंधान को क्षेत्र में पहुँचाने के लिए यह बैठक एक सेतु (टूल्स) के तौर पर काम करता है। पिछली बैठक में तय किए गए बिंदुओं की समीक्षा और भविष्य के लिए नए लक्ष्य तय करने का आग्रह करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक निष्कर्ष तक पहुँचने पर जोर दिया।

सम्मानित अतिथि, श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि, गाँव से लेकर संपूर्ण देश को आत्मनिर्भर बनाने में कारगर साबित होगा। जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से निजात पाने के लिए वैज्ञानिकों से आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य-सरकार का सहयोग भी जरूरी है। राज्य मंत्री ने युवाओं के लिए कृषि में रोजगार के अवसर पैदा करने, किसानों को उचित मूल्य मिलने, बेहतरीन बीज का निर्माण करने और किसानों और बाजार के बीच मौजूद संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकीय मदद से किसानों के बीच जाकर ये बताना होगा कि कौन-से फसल के लिए प्रसंस्करण ईकाई लगाने से अत्यधिक लाभ संभव है।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों की खेती संबंधित समस्याओं और उसके समाधान हेतु हो रहे अनुसंधानों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जंगली जानवरों, चारा आदि की समस्या भी एक चुनौती है। महानिदेशक ने राज्य सरकार के अधिकारियों से आग्रह किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में कृषि-समस्याओं के निवारण हेतु भाकृअनुप द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी को किसानों के बीच पहुंचाएँ। साथ ही, अन्य राज्यों के साथ सुझावों का आदान-प्रदान भी करें।

डॉ. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (बागवानी), भाकृअनुप ने इससे पहले क्षेत्रवार कृषि-समस्याओं को विस्तार से रेखांकित किया।

इस मौके पर भाकृअनुप के पुस्तकों और प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

इस बैठक में राज्य सरकारों के कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य मंत्री, भाकृअनुप शासी निकाय, श्री बिम्बाधर प्रधान, विशेष सचिव एवं वित्त सलाहकार (भा.कृ.अनु.प.), कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति और वैज्ञानिक, भाकृअनुप-संस्थानों/क्षेत्रों के निदेशक और क्षेत्र में स्थित कृषि, पशुपालन एवं राज्य सरकारों के मत्स्य पालन के सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज की।

इस बैठक का आयोजन भाकृअनुप-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा किया गया था।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली)