आई. सी. ए. आर - सी. एस. एस. आर. आई, करनाल में हुआ क्षेत्रीय समिति जोन-V की आई. सी. ए. आर बैठक का उद्घाटन

2 नवंबर 2018, करनाल, हरियाणा

आई. सी. ए. आर क्षेत्रीय समिति जोन-V (पंजाब, हरियाणा और दिल्ली) की दो दिवसीय बैठक (2-3 नवंबर, 2018) का उद्घाटन आज आई. सी. ए. आर. – केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल में किया गया था।

श्री ओम प्रकाश धनकर, कृषि और किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार, ने अपने उद्घाटन संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि स्थान विशिष्ट मुद्दों पर प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और हस्तांतरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब जैसे क्षेत्र ने 'हरित क्रांति' में जबरदस्त योगदान दिया है, जबकि अब यहाँ भी कई सामाजिक-आर्थिक, बाजार, अजैविक और जैविक तनाव उजागर हुए हैं, जिसके लिए संबंधित हितधारकों द्वारा सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। हरियाणा राज्य सरकार ने, स्थानीय संसाधनों जैसे स्वदेशी गाय, जैविक कृषि को एक घटक के रूप में, बागवानी फसल वृद्धि और कृषि उत्पादों में मूल्य वृद्धि को एकीकृत करके फसल विविधीकरण को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने ई-नैम जैसी पहल और नीतियों के बारे में जानकारी दी, कृषि आय बढ़ाने और किसानों के जोखिम को कम करने के लिए, आगत पर सब्सिडी और कृषि-विपणन से मध्यस्थों को खत्म करने की बात करते हुए फसल और पशु बीमा का समर्थन किया।

इस अवसर पर, पंजाब के एक किसान श्री गुरबचन सिंह, जो अपने खेत में फसल अवशेषों का स्थायी प्रबंधन कर रहे हैं और 'मन की बात' श्रृंखला में भारत के माननीय प्रधान मंत्री द्वारा जिनकी सराहना की गई थी, मुख्य अतिथि और क्षेत्रीय समिति की बैठक के अध्यक्ष ने उन्हें पुरस्कृत किया और उनकी सराहना की।

ICAR Meeting of Regional Committee Zone-V inaugurated at ICAR-CSSRI, Karnal

डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, सचिव (डी. ए. आर. ई.) और महानिदेशक (आई. सी. ए. आर.) और क्षेत्रीय समिति की बैठक के अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब और हरियाणा देश के 'खाद्य कटोरे' हैं। यह क्षेत्र राष्ट्रीय पूल में लगभग 20% अनाज का योगदान करता है। वर्तमान में, इस क्षेत्र में कृषि को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे मिट्टी के स्वास्थ्य को विकृत कर रहे हैं (उदाहरण के लिए लवणता), भूजल और जलवायु परिवर्तन में कमी से किसानों के मुनाफे में गिरावट आई है। उन्होंने साझा किया कि, आईसीएआर-युक्त संस्थानों और राज्य सरकार द्वारा किए गए संयुक्त प्रयासों के परिणामसावरूप वर्ष 2107-18 के दौरान फसल अवशेष जलने में लगभग 45% की कमी आई है। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के नेतृत्व वाले संस्थानों द्वारा किए गए प्रयासों, जिसमें ज्वलनशील मुद्दों पर 2 करोड़ कृषकों के साथ बातचीत की गई, और कृषि से संबंधित ज्ञान के प्रदान के लिए 150 मोबाइल एप्स विकसित किए गए, से लगभग 14 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया जा सकता है तथा क्षेत्र की अपर्याप्त भूमि की महत्त्वपूर्ण सीमा को प्रबंधित करने में भी मदद मिल सकती है। डॉ. महापात्रा ने सभी भाग लेने वाले सदस्यों और हितधारकों से किसानों की जरूरतों को लक्षित करने और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को बनाए रखने के लिए अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने के लिए आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि, विशिष्ट क्षेत्र के मुद्दों को समझने एवं विभिन्न राज्यों तक पहुँचने के लिए यह बैठक आई. सी. ए. आर. की एक प्रक्रिया  है।

श्री छाबिलेंद्र राउल, विशेष सचिव (डी. ए. आर. ई.) और सचिव (आई. सी. ए. आर.) ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि स्थापित जीवंत समूह के साथ एक निश्चित समय सीमा में अहम मुद्दों को हल करने के लिए किसान आशाजनक प्रौद्योगिकियों के साथ सीधे पहुँच सकते हैं। इस समूह में कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और रेखा विभाग प्रमुख भूमिका निभाते हैं। क्षेत्रीय समिति की बैठक में इनकी भागीदारी वास्तव में महत्त्वपूर्ण है ताकि वास्तविक समीचीन मुद्दों और आवश्यक समाधानों पर उचित तरीके से चर्चा की जा सके।

डॉ. जे. के. जेना, उप महानिदेशक (मत्स्यपालन और पशु विज्ञान), आई. सी. ए. आर. और बैठक के नोडल अधिकारी ने टिप्पणी की कि, पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के कृषि प्रणालियों में महत्त्वपूर्ण बदलाव हुए हैं तथा प्राकृतिक संसाधनों में कमी भी हुई है। इस क्षेत्र की वर्तमान कृषि समस्याओं के मद्देनजर उन्होंने मछली को महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल करके कृषि में विविधीकरण बढ़ाने जैसे शानदार अवसर की बात कही।

डॉ. पी. सी. शर्मा, सदस्य सचिव, क्षेत्रीय समिति-V और निदेशक, आई. सी. ए. आर. – सी. एस. एस. आर. आई. ने 2016 में हुई पिछली बैठक की कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की और इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों को साझा किया। प्रस्तुति के दौरान, उन्होंने सभी हितधारकों से मुद्दों को परिभाषित करने और क्षेत्र के नीति निर्माताओं, निष्पादकों और किसानों के लिए आवश्यक उचित समाधान विकसित करने में भाग लेने व सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

नीति निर्माताओं सहित 150 प्रतिभागियों, आईसीएआर के गवर्निंग बॉडी सदस्य, नई दिल्ली, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और संबंधित राज्यों के अन्य हितधारकों ने इस बैठक में भाग लिया।

(स्रोत: आई. सी. ए. आर. - सेंट्रल मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल)