अगलर नदी, टिहरी में मछली पकड़ने का त्योहार मनाने के दौरान मछुआरे-किसान हुए जागरूक

28 जून, 2019, उत्तराखंड

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने आज अगलर नदी में आयोजित मछली पकड़ने का त्योहार के दौरान मछुआरों-किसानों को जागरूक किया। इस महोत्सव को गढ़वाल क्षेत्र में 'मौन (moun)' के रूप में जाना जाता है।

उत्सव का आयोजन जौनपुर क्षेत्र, टिहरी गढ़वाल जिला, उत्तराखंड में अटजुला सिलवाड़ पट्टी के समुदायों द्वारा किया गया था।

डॉ. एम. मुरुगानंदम, प्रधान वैज्ञानिक (मत्स्य) ने अपनी टीम के साथ मछुआरों-किसानों और मीडिया के लोगों को परंपरा के प्रभाव, पारिस्थितिकी तंत्र की चिंताओं, जैव विविधता और मत्स्य संसाधनों के बारे में बताया।

 

टीम ने विश्लेषण के लिए पानी और मछली के नमूनों सहित मछली पकड़ने के त्योहार की विभिन्न विशेषताओं पर डेटा एकत्र किया। टीम ने मछुआरों-किसानों के साथ सामूहिक बातचीत भी की। रिसर्च टीम ने कहा कि त्योहार के दौरान सबसे ज्यादा 90% तक सीजोथोरैक्स एसपीपी. (स्थानीय रूप से आसेला के रूप में जाना जाता है) को पकड़ा गया था।

टॉर एसपीपी. (महसीर, स्थानीय रूप से धंसवी के नाम से जाना जाता है), नेओमाचेलीस एसपीपी. (स्थानीय रूप से सागुरु के नाम से जाना जाता है), मास्टेसम्बलस आर्मैटस (स्थानीय रूप से गूज या बाम के रूप में जाना जाता है), बरिलियस एसपी. (स्थानीय रूप से सल्लड़ी के नाम से जाना जाता है), नेओमाक्लेकस एसपीपी. ग्लिप्टोथोरैक्स एसपीपी. (स्थानीय रूप से पगमाछ) गर्रा एसपी. भी त्योहार के दौरान पकड़े गए।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)