‘वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह’ एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन

29 नवंबर, 2018, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, हिंदी अनुभाग द्वारा ‘वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह’ एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन एन. ए. एस. सी. परिसर, नई दिल्ली में किया गया।  

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डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प., ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रदीप टामटा, सांसद, राज्यसभा एवं सदस्य, संसदीय राजभाषा समिति, ने कृषि और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी को स्थापित करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की भूमिका को रेखांकित किया तथा उपलब्धियों के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि, हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा समिति प्रतिबद्ध है।

श्री छबिलेन्‍द्र राऊल, विशेष सचिव, डेयर एवं सचिव, भा.कृ.अनु.प., ने हिंदी की प्रगति के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा हिंदी में काम-काज के चलन को बढ़ावा देने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि, हालाँकि कृषि क्षेत्र की अपनी तकनीकी व वैज्ञानिक शब्दावली है, लेकिन परिषद द्वारा अपने काम-काज में जिस तरह से हिंदी को अपनाया गया है, वह काबिले-तारीफ है।

श्री बिम्बाधर प्रधान, अतिरिक्त सचिव एवं वित्त सलाहकार, भा.कृ.अनु.प., ने याद दिलाया कि 14 सितंबर, 1949 के दिन हिंदी को राजभाषा की मान्यता मिली। उन्होंने हिंदी को तकनीकी दृष्टिकोण से सक्षम और समृद्ध बताते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों से हिंदी में काम-काज करने और उसे समृद्ध बनाने के लिए आग्रह किया।

श्रीमती सीमा चोपड़ा, निदेशक, राजभाषा, भाकृअनुप., ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पिछले एक वर्ष में हिंदी के विकास व उसकी प्रगति के लिए किए गए कार्यों व उपलब्धियों को सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत किया।

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कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि के हाथों विजेता प्रतिभागियों को हिंदी में काम-काज के लिए पुरस्कृत किया गया। दूसरे चरण में, हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।