हिंदी कार्यशाला एवं किसान सम्मेलन का हुआ आयोजन

30 अगस्त, 2019, बीकानेर

भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर में आज ‘भाकृअनुप में राजभाषा हिंदी के बदलते आयाम’ विषय पर कार्यशाला एवं किसान सम्मेलन का उद्घाटन किया गया।

श्री अर्जुन राम  मेघवाल, केंद्रीय संसदीय कार्य एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री ने कहा कि हिंदी भाषा ने धर्म व जाति की दीवारों को तोड़ा है।

मंत्री ने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए जल शक्ति अभियान के बारे में बताते हुए कहा कि इससे बीकानेर क्षेत्र के लिए और अधिक पानी मिलेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने के लिए बंजर जमीन के उपयोग के साथ-साथ पशुपालन एवं डिग्गी व सोलर पंप को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि देश के 65 प्रतिशत लोग कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं और अधिकतर हिंदी भाषी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भाषा के माध्यम से कृषि से जोड़ना होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह जरूरी है कि सभी कार्य हिंदी में हों ताकि विश्व के दूसरे देश भी हिंदी को अपनाएँ। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है कि हिंदी में आनेवाली फाइल की नोटशीट हिंदी में ही तैयार की जायेगी।

श्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री  श्री अर्जुन राम जी मेघवाल, केंद्रीय संसदीय कार्य एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री

श्री चौधरी ने किसान सम्मेलन में उद्बोधन के दौरान किसानों के साथ संवाद करते हुए उनकी समस्याओं के उचित निराकरण का आश्वासन दिया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं जैसे- किसान सम्मान निधि, किसान पेंशन, फसल बीमा योजना आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने शून्य लागत खेती को अपनाने का आग्रह करते हुए कृषि में पशुपालन को बहुत महत्त्वपूर्ण बताया। किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए मंत्री ने किसान उत्पादक संगठन बनाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर दोनों मंत्रियों एवं अन्य सम्मानित अतिथितियों ने संस्थान के विभिन्न फल एवं सब्जियों के अनुसंधान प्रखण्ड का अवलोकन किया। साथ ही, संस्थान की पत्रिका मरू बागवानी का विमोचन एवं पौध रोपण भी किया गया।

डॉ. टी. जानकीराम, सहायक महानिदेशक, भाकृअनुप, नई दिल्ली ने कहा कि गैर हिंदी राज्यों में हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय स्तर से ही हिंदी भाषा को शामिल करना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने की आवश्यकता भी जताई ताकि अधिक-से-अधिक लोग हिंदी की तरफ आकर्षित हों।

डॉ. आर. पी. सिंह, कुलपति, एसकेआरयू, बीकानेर ने कहा कि हिंदी ने देश को एकजुट करने का काम किया है।

डॉ. पी. एल. सरोज, निदेशक, भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर ने अपने स्वागत उद्बोधन में अतिथियों का स्वागत करते हुए ‘भाकृअनुप में राजभाषा हिंदी के बदलते आयाम’ विषय पर दो दिवसीय हिंदी कार्यशाला की रूप रेखा के बारे में बताया एवं कहा कि हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए।

श्री मधु आचार्य, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार, बीकानेर ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति एवं भाषा से होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वही राष्ट्र मजबूत होता है जिसकी संस्कृति एवं भाषा मजबूत होती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए मातृभाषा को मजबूत करना भी जरूरी है। हिंदी के विकास में समाचार पत्रों के योगदान का हवाला देते हुए उन्होंने आग्रह किया कि संस्थानों को भी इस संबंध में अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।

इस कार्यशाला में उत्तर भारत के 50 से भी अधिक संस्थानों के हिंदी अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। किसान सम्मेलन में बीकानेर क्षेत्र (नोखा, खाजूवाला, लूणकरणसर, आदि), बाड़मेर, नागौर, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के आस-पास के लगभग 700 किसानों ने भाग लिया।

श्रीमती सीमा चोपड़ा, निदेशक (राजभाषा) ने अतिथितियों का आभार व्यक्त किया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर)