मातृभाषा पर गर्व करने के साथ-साथ राजभाषा का सम्मान बेहद जरूरी: प्रो. रीता बहुगुणा जोशी

‘वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह’ एवं कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

06 नवंबर, 2019, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पी. सुब्रह्मण्यम सभागार, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर, पूसा, नई दिल्ली में आज ‘वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह’ एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

मातृभाषा पर गर्व करने के साथ-साथ राजभाषा का सम्मान बेहद जरूरी: प्रो. रीता बहुगुणा जोशी   मातृभाषा पर गर्व करने के साथ-साथ राजभाषा का सम्मान बेहद जरूरी: प्रो. रीता बहुगुणा जोशी   मातृभाषा पर गर्व करने के साथ-साथ राजभाषा का सम्मान बेहद जरूरी: प्रो. रीता बहुगुणा जोशी

प्रो. रीता बहुगुणा जोशी, सांसद, लोकसभा एवं संयोजक संसदीय राजभाषा समिति ने बतौर मुख्य अतिथि हिंदी की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से हिंदी में काम-काज करने वालों को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने परिषद के सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे कार्यालयी फ़ाईलों में क्लिष्टता से बचते हुए सरल हिंदी का प्रयोग करें।

प्रो. जोशी ने अनुसंधान क्षेत्र में भी अधिक-से-अधिक हिंदी का प्रयोग करने पर ज़ोर देते हुए कहा कि समय के साथ अब अनिवार्य हो गया है कि हिंदी में एक समृद्ध वैज्ञानिक शब्दावली कोश तैयार किया जाए। विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों आदि के माध्यम से देश भर के कृषि क्षेत्र तथा बीज से बाजार तक किसानों को समृद्ध करने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित प्रौद्योगिकियों तक किसानों/लाभार्थियों की पहुँच के बीच में भाषा एक पुल की तरह कार्य करती है। सांसद महोदया ने कहा कि मातृभाषा पर गर्व करने के साथ-साथ राजभाषा का सम्मान बेहद जरूरी है।  

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि परिषद अपने सभी कार्यक्रमों का संचालन हिंदी में करती है। उन्होंने कहा कि देश भर में किसानों तक अपनी प्रौद्योगिकियों को पहुँचाने के लिए भी परिषद और परिषद के संस्थान हिंदी का ही इस्तेमाल करती है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि आज सभी कंप्यूटर में यूनिकोड हिंदी टाईपिंग की व्यवस्था है।  

महानिदेशक ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हिंदी प्रकाशनों का हवाला देते हुए कहा कि परिषद खेती और फल-फूल जैसे लोकप्रिय पत्रिकाओं का प्रकाशन भी हिंदी में नियमित तौर पर करती है।

डॉ. महापात्र ने कहा कि परिषद हिंदी की प्रगति और हिंदी में काम-काज के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परिषद अपनी योजनाओं के साथ भविष्य में भी ऐसे आयोजन करता रहेगा।

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डा. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूप-रेखा के बारे में बताया। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की योजनाओं/नियमनों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में सॉफ्टवेयर और प्रौद्योगिकी भी हिंदी को बढ़ावा दे रहे हैं।

डा. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (बागवानी एवं फसल विज्ञान) और मनोज कुमार जैन, निदेशक, प्रशासन भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

राजभाषा उल्लास पखवाड़ा कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को इस अवसर पर पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के बाद दूसरे सत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी कविताओं, गजलों, गीतों और दोहों से कवि सम्मेलन को सफल बनाया। 

श्रीमती सीमा चोपड़ा, निदेशक (राजभाषा), परिषद ने 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट का ब्योरा देते हुए सितंबर माह में आयोजित राजभाषा उल्लास पखवाड़ा और विभिन्न प्रतियोगिताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रगति के लिए राजभाषा परिषद की योजनाओं में राजर्षि टंडन पुरस्कार योजना और गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार योजना भी शामिल है।

श्रीमती चोपड़ा ने सभी गणमान्य अतिथियों का आभार प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर परिषद के सभी अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। 

(स्त्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय)