भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में कृषि विज्ञान केंद्रों की सहभागिता बैठक का हुआ आयोजन

8 अप्रैल, 2019, वाराणसी

भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में कृषि विज्ञान केंद्रों की सहभागिता बैठक का हुआ आयोजनभाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में आज पूर्वांचल के 13 कृषि विज्ञान केंद्रों- वाराणसी, मिर्जापुर, चन्दौली, सोनभद्र, भदोही, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, बलिया, आजमगढ़, प्रयागराज, कौशाम्बी एवं प्रतापगढ़ की सहभागिता बैठक का आयोजन किया गया।

डॉ. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) भाकृअनुप, नई दिल्ली ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए तकनीकी हस्तांतरण की जरूरतों और कृषि विज्ञान केंद्रों एवं निजी संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों के प्रक्षेत्र पर हस्तांतरित तकनीकों एवं किसानों द्वारा तकनीकों की ग्राह्यता के बीच के अंतर को कम करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को क्षेत्र में कार्य कर रहे किसान उत्पादकता संगठनों का चयन कर किसानों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान करने की बात कही। डॉ. सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्रों की विभिन्न योजनाओं जैसे - नारी, आर्या, वाटिका इत्यादि को ज्यादा-से-ज्यादा किसानों तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया।

डॉ. पंजाब सिंह, पूर्व सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार एवं पूर्व महानिदेशक, भाकृअनुप, नई दिल्ली बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने पूर्वांचल में कार्यरत फार्ड फाउंडेशन एवं कृषि विज्ञान को साथ मिलकर विभिन्न किसान उत्पादकता संगठन एवं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तकनीकों के प्रसार को मजबूती प्रदान करने पर बल दिया। डॉ. सिंह  ने कहा कि सब्जी उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सब्जियाँ उगाना चाहिए जिससे निर्यात में वृद्धि हो तथा उपभेक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सब्जियाँ उपलब्ध हो सकें। 

डॉ. जगदीश सिंह, निदेशक, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने अपने स्वागत संबोधन में संस्थान द्वारा विकसित सब्जियों की उन्नत किस्मों एवं तकनीकियों को रेखांकित किया। सब्जियों के अंतर्गत क्षेत्रफल बढ़ाने की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि छोटी अवधि की फसल होने के कारण सब्जियाँ अलग-अलग फसल चक्रों में अच्छे-से समाहित हो जाती हैं तथा किसानों को अधिक लाभ देती हैं।

डॉ. रमेश चन्द्र, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और डॉ. अरविन्द कुमार, निदेशक, अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, वाराणसी ने संस्थान द्वारा विकसित तकनीकियों को किसानों के प्रक्षेत्र तक सफलतापूर्वक ले जाने पर प्रकाश डाला।

डॉ. अतर सिंह, निदेशक, अटारी, कानपुर ने इसके पूर्व बैठक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

इस अवसर पर बैठक में भाग ले रहे 13 विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों द्वारा अपने-अपने जनपदों में किसान, महिलाओं एवं युवाओं के लिये कृषि के क्षेत्र में उद्यमिता विकास एवं कृषि विविधिकरण द्वारा आय बढ़ाने के संबंध में चल रहे कार्यों एवं भविष्य की आवश्यक योजनाओं का प्रस्तुतिकरण किया गया।

इस अवसर पर विभिन्न वैज्ञानिकों एवं किसानों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की।

(स्रोतः भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी)