जनजातीय कृषको का ‘पर्वतीय फसलों का बीजोत्पादन एवं कृषिगत उद्यम‘ पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

25 फरवरीए अल्मोड़ा। 

भाकृअनुप.विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्म¨ड़ा के प्रय¨गात्मक प्रक्षेत्र, हवालबाग में जनजातीय उप-योजना कार्यक्रम के अन्तर्गत ‘पर्वतीय फसलों का बीजोत्पादन एवं कृषिगत उद्यम’ विषय पर 25 फरवरी से 01 मार्च 2019 तक पाँच-दिवसीय कौशल एवं उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भाकृअनुप.भारतीय बीज अनुसंधान संस्थान की जनजातीय उप-योजना मुख्य स्कीम के तहत किया गया।

जनजातीय कृषको का ‘पर्वतीय फसलों का बीजोत्पादन एवं कृषिगत उद्यम‘ पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीजोत्पादन की सामान्य विधियाँ तथा गेहूँ, ज©, सब्जी फसल¨ं में बीज¨त्पादन, बेम©समी सब्जी उत्पादन एवं तकनीकी की जानकारी संबंधित विश्¨षज्ञों द्वारा विस्तार से कृषक¨ं क¨ बतायी गयी। इसके अलावा कृषक¨ं को कृषि कार्यों में प्रयुक्त ह¨ने वाले छोटे कृषि यंत्र्ा®ं तथा विभिन्न फसलों की मढ़ाई और गहाई हेत ुसंस्थान द्वारा विकसित यंत्रों के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। साथ ही जैविक कृषि तथा जैविक बीज प्रमाणीकरण हेतु आवश्यक क्रियाकलाप, सब्जी एवं फल फसल¨ं में रोग प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तकनीकी, सब्जी एवं फल फसल¨ं में समेकित कीट प्रबंधन, पशुधन प्रबंधन, बीज संसाधन की सामान्य विधियाँ एवं यंत्र इत्यादि पर भी कृषकों को विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षणार्थियों को ग¨विन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, क¨सी कटारमल के ग्रामीण तकनीकी परिसर का भ्रमण कराया गया। जिसमें संस्थान द्वारा विकसित बाय¨ब्रिकेट व बाय¨ग्ल®ब्यूल पर वैज्ञानिक®ं ने जानकारी दी।  पशुधन प्रबन्धन पर विस्तृत जानकारी  भी दीगई। प्राय¨गिक प्रशिक्षण हेतु कृषक¨ं क¨ गेहूँ, मटर, मसूर आदि रबी फसल¨ं के बीज उत्पादन के तकनीकी पहलुअ¨ं की जानकारी उन्हें बीज उत्पादन क्षेत्रों पर ले जाकर व्यवहारिक त©र पर दिया गया।

संस्थान के निदेशक डाॅ0 अरूणव पट्टनायक ने कृषक¨ं से कृषि में उन्नत एवं वैज्ञानिक विधि क¨ अपनाकर अपनी आय तथा फसल¨ं की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त उन्ह¨ंने संस्थान द्वारा पर्वतीय कृषि को नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिये किये गये महत्वपूर्ण शोध कार्यों की जानकारी विस्तारपूर्वक दी।

कार्यक्रम के अन्त में कृषक¨ं से प्रशिक्षण तथा उनकी समस्याअ¨ं के विषय में खुला विचार-विमर्श हुआ।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लाह©ल-स्पिति, हिमाचल प्रदेश के 4 गाँवों से किसानों एवं  कृषक महिलाअ¨ं ने भाग लिया।