कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के कार्यालय भवन का हुआ शिलान्यास

4 नवंबर, 2019

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के नए कार्यालय भवन का शिलान्यास किया। शिलान्यास के बाद भवन के निर्माण की सुनिश्चितता के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह भवन पर्यावरण के अनुकूल होगा।

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मंत्री ने कहा कि 01 नवंबर, 1973 को जस्टिस गजेंद्र गडकर कमिटी की सिफ़ारिशों के बाद वैज्ञानिकों के चयन में पारदर्शिता लाने तथा शैक्षणिक योग्यताओं में एकरूपता लाने के लिए कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल की स्थापना की गई थी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अपने 45 वर्षों के कार्यकाल में मंडल ने वैज्ञानिकों की नियुक्ति के साथ-साथ संस्थानों के निदेशक, मुख्यालय में सहायक महानिदेशकों तथा उपमहानिदेशकों के गुणवत्तापूर्ण चयन में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने 01 अगस्त, 2018 को मंडल की संरचना में हुए परिवर्तन का हवाला देते हुए कहा कि मंडल पर कार्य का बोझ बढ़ने की वजह से उसे मजबूती प्रदान करने, अधिकार देने तथा पारदर्शिता बानाए रखने के लिए समय-समय पर भारत सरकार द्वारा इसके ढाँचा में जरूरी परिवर्तन किए जाते रहे हैं।   

श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसानों की आय दुगुनी हो, उत्पाद में वृद्धि हो  तथा देश एक बड़े निर्यातक के तौर पर उभरे। इन सबके लिए किसानों की मेहनत, उनका प्रशिक्षण, बेहतर बीज और उर्वरकों के उचित उपयोग हेतु जागरूकता के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों का होना बहुत ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे में वैज्ञानिकों के चयन-प्रक्रिया से लेकर उनके पदोन्नति तक में कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा कि इसके कार्यों में गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों से युक्त स्वतंत्र भवन में स्थापित किया जाना जरूरी था। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में भी कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल महत्त्वपूर्ण पैरामीटर को ध्यान में रखते हुए चयन करेगी।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने नए भवन के शिलान्यास के अवसर पर इससे जुड़ी शुरुआती समस्याओं से अवगत काराया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के लिए वैज्ञानिकों के चुनाव से लेकर संस्थानों के निदेशक, मुख्यालय में सहायक महानिदेशकों तथा उपमहानिदेशकों के गुणवत्तापूर्ण चयन में कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के योगदान और उसके अब तक की उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे कई बार कई पदों के लिए उनके खुद का भी चुनाव इसी मंडल के जरिए हुआ है।

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महानिदेशक ने कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल की कार्य-पद्धतियों में हुए बदलाव के बारे में बताया कि कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल का उनसे अलग स्वतंत्र भवन हो जहाँ वह स्वायत संस्था के तौर पर पारदर्शिता और मजबूती से अपने कार्यों को अंजाम दे सके।

प्रो. (डॉ.) ए. के. मिश्रा, अध्यक्ष, कृ. वै. च. मं. ने कहा कि अगले डेढ़ से दो वर्षों में यह भवन बनकर तैयार हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आज यदि हम खाद्यानों का निर्यात कर रहे हैं तो इसमें किसानों की मेहनत के साथ-साथ वैज्ञानिकों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। प्रो. मिश्रा ने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अपने शुरुआती दौर से अब तक कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल ने कृषि-वैज्ञानिकों के चयन के साथ-साथ सफलतापूर्वक नेट अभ्यर्थियों का चयन भी किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारतीय वैज्ञानिकों के अलावा दूसरे देशों के वैज्ञानिकों के चयन की प्रक्रिया भी हमारे नए कार्य-प्रणाली में शामिल होगा।  

विवेक अग्रवाल, सचिव, कृ. वै. च. मं. ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूप-रेखा के बारे में बताया और यह जानकारी दी कि भारत सरकार द्वारा कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल को 01, अगस्त 2018 से स्वायत संस्था के तौर पर मान्यता दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर कृषि-क्षेत्र के लिए कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि 2.5 एकड़ में निर्मित होने जा रही यह भवन गृह 05 स्टार रेटिंग के अनुकूल होगी।

मंच पर कृ. वै. च. मं. के सदस्य पी. के. चक्रवर्ती और के. के. सिंह भी उपस्थित रहे।

ए. के. श्रीवास्तव, सदस्य, कृ. वै. च. मं. ने गणमान्य अतिथियों को आभार प्रस्तुत किया।   

इस समारोह में भा.कृ.अनु.प. मुख्यालय के सहायक महानिदेशक, उप महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प.-संस्थानों के निदेशक और अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

(स्त्रोत: भा.कृ.अनु.प.-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)