किसान और उपभोक्ता के बीच की परतों और उपज की बर्बादी को कम करना हमारी प्राथमिकता: श्री नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तीसरे विश्व आलू सम्मेलन को किया संबोधित

28 जनवरी, 2020, गांधीनगर, गुजरात

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तीसरे विश्व आलू सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण यह है कि आलू सम्मेलन, एग्री एक्सपो और आलू क्षेत्र दिवस सभी एक ही समय में हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सराहनीय प्रयास है कि 6 हजार किसान फील्ड डे के मौके पर खेतों में जा रहे हैं।

3rd Global Potato Conclave 2020

श्री मोदी ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत में आलू की खेती के तहत क्षेत्र फलक में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि इसी अवधि में गुजरात में इस क्षेत्र में करीब 170 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य की नीतिगत पहलों, कृषि के आधुनिक तरीकों, सर्वश्रेष्ठ शीत भंडारण सुविधाओं, प्रमुख आलू प्रसंस्करण उद्योगों के कारण वर्तमान में आलू के अधिकांश निर्यातक इसी राज्य से हैं।

3rd Global Potato Conclave 2020

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के प्रयासों और सरकार की नीति के संयोजन के परिणामस्वरूप, भारत कई अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों के उत्पादन में दुनिया के शीर्ष 3 देशों में शामिल है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार की प्राथमिकता किसान और उपभोक्ता के बीच बिचौलियों और अन्य परतों को कम करना है।

3rd Global Potato Conclave 2020  3rd Global Potato Conclave 2020

श्री मोदी ने कहा कि सरकार का जोर कृषि प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्ट अप को बढ़ावा देने पर भी है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमता, ब्लॉक चेन, ड्रोन प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि में विभिन्न मुद्दों का समाधान उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय और नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह देखना है कि कोई भी भूखा या कुपोषित न रहे।

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में आलू की विकास यात्रा में भाकृअनुप-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्‍थान, शिमला की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आलू के उत्पादन दर में अप्रत्याशित वृद्धि का हवाला देते हुए यह भी बताया कि किस तरह दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वत श्रृंखलाओं में जन्मा आलू आज भारत के सभी घरों में अपनी पहुँच बना चुका है। श्री तोमर ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती से ही आर्थिक प्रतिकूलता का सामना करना संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि आलू के क्षेत्र में व्याप्त चुनौतियों का सामना करने और संभावित लक्ष्य तक पहुँचने के लिए यह सम्मेलन एक बेहतर दिशा-निर्देश तैयार करेगा।  

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मुख्य अतिथि, श्री विजयभाई रुपानी जी, मुख्यमंत्री, गुजरात ने आयोजन को गुजरात राज्य में करने के लिए आयोजकों की सराहना की। उन्होंने गुजरात में अल्पावधि में आलू उत्पादन एवं प्रसंस्करण में हुई प्रगति के विषय में चर्चा की और आयोजन के सफलतापूर्वक संपन्न होने की कामना की।

श्री पुरुषोत्तम रूपाला, राज्य मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने आलू की नई विकसित किस्मों के लिए वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं, संबंधित संस्थानों और किसानों की सराहना करते हुए सम्मेलन के सफलतापूर्वक आयोजन की बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन आलू किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।  

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए इस सम्मेलन की संक्षिप्त जानकारी दी और कृषि में आलू के विकास और उससे किसान के आय में हुए वृद्धि को रेखांकित किया।

3rd Global Potato Conclave 2020  3rd Global Potato Conclave 2020

इस अवसर पर फल फूल और इंडियन हॉर्टिकल्चर के आलू विशेषांक का विमोचन किया गया और साथ ही इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संबंधित किसानों और उद्यमियों को पुरस्कृत भी किया गया।

इस सम्मेलन में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों, किसानों और छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।  

पृष्ठभूमि

भाकृअनुप-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्‍थान, शिमला, भारतीय आलू एसोसिएशन (आईपीए) और अंतरराष्‍ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी), लीमा, पेरू के सहयोग से 28-30 जनवरी, 2020 तक गांधीनगर, गुजरात में तीन दिवसीय तीसरे विश्व आलू सम्मेलन का आयोजन किया गया। 1999 और 2008 में दो बार दिल्ली में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन पहली बार दिल्ली से बाहर हो रहा है। यह सम्मेलन सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने का अवसर प्रदान करेगा।

इस कार्यक्रम के तीन प्रमुख हिस्‍से हैं – (i) आलू सम्‍मेलन (ii) कृषि निर्यात और (iii)  आलू की खेती का दिन।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)